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शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई (69)

                 

               शहद की गुड़िया - प्रकरण 69

        " और दादू में मुड़कर पीछे देखकर बड़े उत्साहित होकर जवाब दिया था. "

         " श्रीं नाथ द्वारा. "

          " ऊस पर ड्राइवर ने बताया था.. हम लोग अम्बाजी जा रहे हैं. अगर आप को जाना हो तो हम आप को  बस के किराये में वहाँ तक छोड़ सकते हैं. "

           " दादू ऊस के बाद अपने परिवार को अम्बाजी ले जाने वाले थे, ऊस में पहले दूसरे का कोई प्रश्न नहीं था. और दादू ने खुशी खुशी यह ओफर स्वीकार लिया था. "

            " और सब लोग एक एक कर के एम्बुलेंस में बैठ गये थे.. साथ में दो आदमी थे. उन्होंने ने सामान चढ़ाने में सहायता की थी. "

            , " और तेज गति  हाईवे पर दौड़ने लगी थी. ड्राइवर बार बार हॉर्न बजाकर सब से आगे निकलने की कोशिश करता था. एम्बुलेंस थी और ऊस में कोई बीमार होगा यह सोचकर अन्य वाहक चालक उन्हें आगे जाने देता था. "

             " यह एक अजीब यात्रा भी.. दादू के नसीब में इस तरह जाना लिखा था. प्रभुने भी उन की यह इच्छा पूर्ण की थी इस लिये उन्होंने पाड माना था. "

              " एम्बुलेंस में यात्रा एक थ्रीलिंग अनुभव था.. ऊस में एक तकलीफ थी. रात को उन्हें बर्थ पर सोने का मौका नहीं मिलेगा. उन्हें बैठे बैठे ही जाना था. और यह बात दादू, उन की बीवी ने ही बच्चों ने भी खुशी खुशी कबूल कर ली थी. "

               " रात को दस बजे के इर्द गिर्द हाईवे पर एक ढाबे में सब ने खाना खाया था.. एक अजीब सा अनुभव था. "

             " एम्बुलेंस तेज गति से आगे बढ़ती जा रही थी. रात को चार बज गये थे. और अहमदाबाद के पहले एक अकस्मात हुआ था. ऊस वजह से ट्रैफिक जाम हो गया था. ऊस वजह से अम्बाजी पहुंचते पहुँचते नौ बज गये थे. ड्राइवर भी रास्ता भूल गया था. इस वजह से भी देरी हुई थी.

               " उन्होंने एक गेस्ट हाउस में रूम बुक किया था. और सामान वहाँ पर रखकर मंदिर में दर्शन करने गये थे. ऊस के पहले सब ने चाय नास्ता किया था. "

               " जो भी मंदिर थे उन के बड़ी श्रद्धा से दर्शन किये थे. और एक बजे खाना खाकर गेस्ट हाउस लौटे थे. और आराम किया था. "

            " और शाम को 5 बजे के बाद दोबारा दर्शन को निकले थे. दर्शन के बाद वह लोग बाजार में घूमे थे. और बहुत कुछ खरीदी की थी. भगवान की छबि और आरती की किताबें भी खरीदी थी. बच्चों को कुछ और पसंद आया था, उन के लिये भी खरीद की थी. "

              " सब लोग बुरी तरह थक गये थे. लेकिन नींद की वजह से उन्हें थोड़ा सोना जरूरी था. दादू ने सब को कह दिया था : नौ बजे सब लोग सो गये थे. और सुबह तक बिस्तर से उठ नहीं पाये थे. "

              " उसी दिन दोपहर को खाना खाने के बाद बस में वह लोग माउंट आबू गये थे.. वहाँ का नखी तालाब देखकर बच्चे भी बड़े खुशी हो गये थे. वहाँ लौंच सुविधा उपलब्ध थी.. और बच्चों ने ऊस में यात्रा कर के खुशी महसूस की थी. "

              " दो दिन वहाँ रहकर वह लोग श्री नाथ द्वारा और उदयपुर गये थे. वहाँ उन्होंने मयूझियम और ऐतिहासिक ईमारतो की मुलाक़ात की थी.

            " और वहाँ से श्री नाथ द्वारा पहुंचे थे. वहाँ भी हर एक मंदिर में उन्होंने दर्शन किये थे. देखने लायक हर कोई चीज देखी थी.  "

              " बाजार में से जरूरी चीजे खरीदी थी. "

           " दादू ने बाद में अहमदाबाद जाने का कार्यक्रम बनाया था. ऊस की टिकिट भी बुक की थी. और रात को खाना खाकर अहमदाबाद की यात्रा शुरू की थी. बस उदयपुर पहुंची थी. तो दादू को झटका मिला था. "

            " ड्राइवर ने सभी यात्रियों को आदेश दिया था. यहाँ उतर जाओ, आप को दूसरा बस मिल जायेगा. रात के बारह बज गये थे और आसपास, दूर कोई दूसरी बस  होने के आसार नजर नहीं आ रहे थे. "

            " और दादू और उन के परिवार को रात भर बर्फ़ीली ठंडी में गुजारनी पड़ी थी.. झगड़ा करने के बार टिकिट के पैसे तो मिल गये थे. लेकिन दोनों वक़्त उन्हें ऐसा अनुभव हुआ था.. ऊस बात से दादू अपने आप को अपराधी मानने लगे थे इस में निश्चिन्त उनके पिताजी की आह शामिल थी यह बात वह नकार नहीं सके थे.. "

              " सुबह सात बजे उन्हें अहमदाबाद के लिये बस मिली थी और दस बजे के करीब वह पहुंच गये थे. एक होटल में उतरे थे . लाल दरवाजे के पास दर्शन किये थे. और होटल में भोजन किया था. और होटल आकर सो गये थे. शाम को थोड़ा बाजार में चक्कर लगाये थे कुछ चीजे खरीदी थी. और रात को आठ बजे मानिक चौक में जाकर खाना खाया था. रात को दस बजे मुंबई की बस छूटने वाली थी. और वह लोग पैक अप कर के 9-45 तक बस डिपो पहुँच गये थे. सारी यात्रा के दौरान उन का यह सफर बिल्कुल शान्तिमय और सूखदाई रहा था... "

             " सुबह सात बजे के करीब वह लोग घर पहुंच गये थे. थोड़ा आराम कर के दादू अपने काम के लिये घर से निकल पड़े थे. जो ठीक शाम को घर लौटे थे.. ऊस वक़्त दादू के साली-साढ़ू भाई और बहन बहनोई वहाँ आकर बैठे थे. "

             " ऊस दिन क्रिकेट मैच था और लडके ने टी वी बंद रखा था, ऊस पर दादू को अचरज हुआ था. उन्होंने टी वी स्विच ओन करने की कोशिश की तो साढ़ू भाई ने कहां,  सुनकर दादू अपने होंश खो बैठे. "

             " आप के पिताजी अब नहीं रहे. कल रात अहमदाबाद में उन का बुआ के घरमे निधन हो गया हैं. "

               " अभी सुबह में वह लोग अहमदाबाद से आये थे अगली रात वह उधर ही थे. वह बुआ के घर जाने वाले भी थे. बाद में समय ना मिलने की वजह से वहाँ गये नहीं थे और ऊस के पीछे यह हादसा हो गया था. "

                         0000000000   ( क्रमशः)