part 6इस बार उसने खुद को रोका नहीं।हर्ष की आवाज़धीमी थी, लेकिन साफ़।“मैं नहीं जानताकि आप यह सुनेंगी ...
part- 5सुहानी ने मोबाइल को देर तक देखा।हर्ष का voice note अब भी वहीं था—सुना हुआ, लेकिन महसूस ...
Part- 4सुहानी ने लैपटॉप खोला।स्क्रीन पर मीटिंग इनवाइट पहले से खुला था।समय में अभी पाँच मिनट बाकी थे,लेकिन उसका ...
part -3सुहानी मोबाइल को देखे जा रही थी।स्क्रीन पर वही शब्द रुके हुए थे—“Harsh is typing…”उसने एक पल ...
PART–2सुहानी को घर पहुँचते ही एहसास हुआ कि कुछ छूट गया है।बैग खोला।डायरी थी।चाबियाँ थीं।मोबाइल था।लेकिन चार्जर नहीं ...
पार्ट - 1सुहानी को भीड़ पसंद नहीं थी, लेकिन अकेलापन उससे भी ज़्यादा डराता था।शहर की यह शाम ...
भाग – 13 last partलेकिन समाजअब भी बाहर खड़ा था।माँ ने पूछा—“फैसला कर लिया?”सृष्टि ने जवाब दिया—“हाँ। मां जी ...
भाग – 12गाँव की मिट्टीआज सृष्टि के पैरों कोपहले जैसी नहीं लगी।न डर था,न अपनापन—बस एक ठोस सच्चाई।अंकित उसके ...
भाग – 11रात बहुत भारी थी।ऐसी रात, जिसमें नींद आँखों से नहींसोचों से भाग जाती है।सृष्टि खिड़की के पास ...
भाग – 10शाम का समय था।सृष्टि की सिलाई मशीन आज कुछ ज़्यादा देर तक चलती रही।काम अब बढ़ने लगा ...