अध्याय 1: ख़ामोशी के साएरात के बारह बज चुके थे। साहिबाबाद की उस तंग और अंधेरी गली में सन्नाटा ...
रात का भारी सन्नाटा अब ढलने लगा था और सुबह की हल्की, ठंडी रोशनी कमरे के भारी पर्दों के ...
पुराने वेयरहाउस में फैली सीलन और धूल की गंध के बीच सन्नाटा किसी गहरे तूफ़ान का अहसास करा रहा ...
हवेली की विशाल संगमरमर की दीवार पर टंगी प्राचीन घड़ी ने जैसे ही शाम के सात बजने का ऐलान ...
"कहिए करण सर, या फिर मिस्टर करण मेहरा कहूँ?" आरव ने फोन कान से लगाते ही बिना किसी भूमिका ...
कमरे का भारी और स्वचालित दरवाज़ा आर्यन के बाहर जाते ही एक कड़क आवाज़ के साथ बंद हो गया। ...
कैफे के उस सन्नाटे में रिया के शब्दों ने एक नया तूफ़ान खड़ा कर दिया था। आरव की तीखी ...
सुबह की हल्की सुनहरी धूप कमरे के भारी और कीमती रेशमी पर्दों की सिलवटों के बीच से छनकर विशाल ...
तस्वीर देखते ही रिया के चेहरे पर हवाइयाँ उड़ने लगीं। जो आँखें अब तक मासूमियत और चंचलता से छलकती ...
रात का सन्नाटा कमरे की चार दीवारों के भीतर और गहराता जा रहा था। मद्धम पीली रोशनी में आर्यन ...