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मन के अल्फाज - ख्वाहिश की कविताएं। - 2

by khwahishh
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1.) डर लग रहा है।“ आज मुझे डर लग रहा है…!कहीं वक्त से पहले ये वक्त ना बदल जाए।जिंदगी ...

मन के अल्फाज - ख्वाहिश की कविताएं। - 1

by khwahishh
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1.स्याही का दामन।"मेरे लफ्जो ने स्याही का दामन थाम लिया है।अब लिखूँगी मैं अपनी किश्मत अपने ही हाथो से।लिखूँगी ...

वैदही - 2

by khwahishh
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काले शीशों वाली एक लंबी ब्लैक BMW अंदर आई। इंजन की धीमी घरघराहट के साथ सबकी नज़र उसी पर ...

वैदही - 1

by khwahishh
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धूप का हल्का पीला रंग खेतों की मेड़ों पर फैल रहा था। कहीं दूर एक बच्ची मिट्टी से सनी ...

अनजानी मोहोब्बत - 1

by khwahishh
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शहर की रात रंगीन थी। सड़क के उस कोने पर, जहाँ एक पुराना रेस्टोरेंट पार्टी के म्यूज़िक से गूंज ...