बिट्टू श्री दार्शनिक stories download free PDF

इश्क बचपन का ही क्यों ? दार्शनिक दृष्टि

by आचार्य. जिज्ञासु चौहान
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अक्सर ऐसा देखा है या सुना है या अनुभव किया है ना की शादी के बाद इश्क या प्रेम ...

कॉन्डम और प्रेम के हालात

by आचार्य. जिज्ञासु चौहान
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"कॉन्डम" स्कूल जाते बच्चे से ले कर के आज की पीढ़ी के हर बूढ़े लोग तक इस शब्द को ...

આજનું ભારણ વધુ પડતું ભણતર

by आचार्य. जिज्ञासु चौहान
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ભણતરનો ભાર ખરું કૌ તો, વણ માગ્યો અને વણ જોઈતો જ છે.ભણ્યા પછી જ્યારે કમાવા નીકળીએ ત્યારે ખબર પડે ...

साड़ी और वेस्टर्न ड्रेस... कहां बेशर्मी... कहां संस्कार...

by आचार्य. जिज्ञासु चौहान
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हां सही है की, "आज के ज़माने में स्त्री यदि वेस्टर्न ड्रेस पहने तो बेशर्मी और साड़ी पहने तो ...

दहेज प्रथा और दार्शनिक दृष्टि

by आचार्य. जिज्ञासु चौहान
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जुगाड़ू: दार्शनिक! यहां अकेले खड़े क्या सोच रहे हो ?वो भी इतनी रात गए !?दार्शनिक: देख रहा हूं।जुगाड़ू: क्या ...

२४ मार्च २०२१ पहली मुलाकात सखी से

by आचार्य. जिज्ञासु चौहान
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दुनियां में हर किसी का कोई न कोई दोस्त होता ही है।अगर ना हो तो बनानेे पड़ते है। खुशनसीब ...

“મા”ના અસ્તિત્વની મારી કલ્પના

by आचार्य. जिज्ञासु चौहान
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Instagram: @publishedphilosopher એક બાળક જન્મે ત્યારે એની લંબાઈ લગભગ 50 સેમી અને માતાની લગભગ 150, 160 સેમી હોય છે. એટલે ...

મા ના હૈયાથી વાત

by आचार्य. जिज्ञासु चौहान
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(ઘણાં વર્ષે આજે બપોરે ઘરે આવ્યો છું)મા ! હું આવી ગયો ! મા ! ક્યાં છે ? બઉ ભૂખ ...

मेरी प्यारी नाराज ममा

by आचार्य. जिज्ञासु चौहान
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में ममा की बात मान नहीं रहा था। उसका दिल बार बार दुखाए जा रहा था। कई बार लगा ...