एक घर… जो गहरे अंधेरे में डूबा था।चारों तरफ़ एक भयावह सन्नाटा पसरा हुआ था।सिर्फ़ घड़ी की टिक-टिक… टिक-टिक… ...
कमरे में सिर पकड़े बैठी कुसुम के ज़ेहन में ! बारह बरस पहले की यादों ने हल्के से दस्तक ...
कुसुम सामने बैठे शीशे में खुद को घूरे जा रही थी। उसने खुद को देखा ! लाल साड़ी, बड़े-बड़े ...