चौथा बच्चाअंधेरा।चारों तरफ सिर्फ अंधेरा था।आरव को कुछ दिखाई नहीं दे रहा था।उसे सिर्फ अपनी साँसों की आवाज सुनाई ...
तीसरा हिस्सा“अब तीन हैं।”दीवार पर लिखे ये तीन शब्द अभी भी चमक रहे थे।आरव उन्हें घूरता रहा।उसकी आँखों के ...
दूसरा आरव“भैया…”आवाज फिर सुनाई दी।आरव वहीं खड़ा रह गया।सामने अंधेरे में एक लड़की थी।हाथ में वही लकड़ी की सीटी।चेहरा ...
हर दस साल बाद लौटने वालाआरव उस पालने के सामने खड़ा था।उसकी आँखें बच्चे के चेहरे पर टिकी थीं।वही ...
जिसे माँ ने जन्म नहीं दिया थाआरव ने आँखें खोलीं।कुछ सेकंड तक उसे समझ ही नहीं आया कि वह ...
जिस घर में आरव पहले भी रह चुका थासुबह के ठीक पाँच बज रहे थे।घर के अंदर अजीब-सी खामोशी ...
असली आरवआरव ने पीछे मुड़कर देखा।सड़क खाली थी।भैरवपुर…गायब हो चुका था।न मंदिर।न स्कूल।न वह पुराना गाँव।न उसकी माँ।कुछ भी ...
माँ जो कभी मरी ही नहीं“बेटा…”आवाज सुनते ही आरव की आँखें फैल गईं।वह आवाज…उसकी माँ की थी।वही आवाज जिसे ...
वो गाँव जो हर रात गायब हो जाता थाPart 4 — मंदिर के नीचे का रास्ता“पापा…”आवाज सुनते ही आरव ...
Part 3 — 1987 की तस्वीर में कौन था आरव?आईना टूट चुका था।कमरे के फर्श पर बिखरे हुए काँच ...