Jayanti Ranganathan stories download free PDF

एक दिन, हजार रातें  

by Jayanti Ranganathan
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ट्रेन चलने से काफी पहले आ गई थी वो स्टेशन। हमेशा के लिए मुंबई छोड़ रही थी। इसलिए सामान ...

बर्फीली रातों के गुलदस्ते

by Jayanti Ranganathan
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शीला शाम को जब लंबी सैर से वापस आई, सामने ही उसे राबर्ट नजर आ गया अपने कुत्ते जीरो ...

उसकी रातों में सुबह नहीं थी

by Jayanti Ranganathan
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उसकी रातों में सुबह नहीं थी जयंती रंगनाथन उसने अपना नाम बताया—सौम्या। मां कहती थी कि मैं हमेशा अपने ...

लूज कैरेक्टर

by Jayanti Ranganathan
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लूज कैरेक्टर जयंती रंगनाथन गनीमत... कमरे का दरवाजा खुला हुआ था। हलका सा दरवाजा धकेल कर मैंने अपना सिर ...

अजीब औरत

by Jayanti Ranganathan
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बिल्डिंग के सामने उर्षिला ने अपनी लंबी गाड़ी पार्क की ही थी कि सीढिय़ों के पीछे खंभे से सटकर ...

कमीना तू, कमीनी मैं

by Jayanti Ranganathan
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‘आज का न्यूज पेपर देखा? पहले पेज पर खबर थी। दस साल बाद कॉलेज की एक लेक्चरार ने अपने ...