GANESH TEWARI 'NESH' (NASH) stories download free PDF

वह देवों का देव

by GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-(34) की व्याख्या--"देवो देवनामसि"ऋग्वेद- 1-94-13अर्थ--हे प्रभु ! तू देवों का देव है।विस्तृत भावार्थ :इस मन्त्र में परमात्मा की ...

मुक्ति की कामना

by GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)
  • 210

ऋगुवेद सूक्ति--(३५) की व्याख्या"स न: पर्षदति द्विष:"।ऋगुवेद 10-187-5भावार्थ--वह परमात्मा हमें सब कष्टों से पार करे।पदच्छेद--सः । नः । पर्षत् ...

सर्वभूतहितेरत

by GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)
  • 459

ऋगुवेद सूक्ति--(३६) की व्याख्या"मा नः प्रजा रीरिषः”ऋगुवेद--१०/१८/१अर्थ-- हे प्रभु ! तू हमारी सन्तानों को नष्ट न कर।शब्दार्थ--मा = मत ...

सत्य की खोज

by GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)
  • 360

ऋगुवेद सूक्ति--(३७) की व्याख्या"सत्या मनसो मे अस्तु"ऋगुवेद--१०/१२८/४भाव--मेरे‌‌ मन के भाव सच्चे हों।"सत्या मनसो मे अस्ति"पदच्छेद--सत्या । मनसः । मे ...

शत्रु हृदय में भय

by GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)
  • 513

ऋगुवेद सूक्ति-- (३८) की व्याख्या --"भियं दधाना हृदयेषु शत्रुव:"ऋगुवेद--१०/८४/७भाव--शत्रु के हृदय में भय उत्पन्न कर दो।भियं दधाना हृदयेषु शत्रूणाम्।शाब्दिक ...

साहस मत छोड़ो

by GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)
  • 458

ऋग्वेद सूक्ति-- (39) कीन धृष्णुं त्यजेत--९/९७/७ऋगुवेदभावार्थ --साहस मत छोड़ो।पूरा मूल मंत्र --यहाँ दिया गया संदर्भ ऋग्वेद 9.97.7 से जुड़ा ...

उसके समान कोई नहीं

by GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)
  • 561

ऋगुवेद सूक्ति-- (४०) की व्याख्यान त्वदन्यो मघवन्नस्य मर्दिता --ऋगुवेद--१/८४/१९भावार्थ --हे मघवन(ईश्वर) ! आपके सिवा दूसरा सुख देने वाला कोई ...

परम ज्योति

by GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)
  • 660

ऋगुवेद सूक्ति-- (४१) की व्याख्याऋगुवेद सूक्ति--"आर्य ज्योतिरग्रा:"ऋगुवेद-७/३३/७भावार्थ --आर्य ज्योति को प्राप्त करने वाला होता है।मंत्र-“आर्य ज्योतिरग्राः …” — ७/३३/७भावार्थ--यह ...

श्रैष्ठ मार्ग

by GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)
  • 633

ऋगुवेद सूक्ति-- (४१) की व्याख्याऋगुवेद सूक्ति--"आर्य ज्योतिरग्रा:"ऋगुवेद-७/३३/७भावार्थ --आर्य ज्योति को प्राप्त करने वाला होता है।मंत्र-“आर्य ज्योतिरग्राः …” — ७/३३/७भावार्थ--यह ...

पीड़ितों की मदद

by GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)
  • 672

४ऋगुवेद सूक्ति-- (४२) की व्याख्याकरो यत्र वरिवो बाधिताय।६/१८/१४भावार्थ --पीड़ितों की सहायता करने वाले हाथ ही उत्तम है।मंत्र +-ऋग्वेद ६/१८/१४—उसका ...