Vrajesh Shashikant Dave stories download free PDF

अन्तर्निहित - 30

by Vrajesh Shashikant Dave
  • 81

[30]‘शैल को गए इतना समय हो गया। अभी तक नहीं लौटा। क्या कभी नहीं लौटेगा?’‘संभव है सारा, सब कुछ ...

अन्तर्निहित - 29

by Vrajesh Shashikant Dave
  • 342

29]“आप?” दोनों ने एक साथ पूछा।“हाँ, मैं। इतने दिनों के समय में आप के पास कोई ठोस प्रमाण नहीं ...

अन्तर्निहित - 28

by Vrajesh Shashikant Dave
  • 558

[28]“तो अब आप पदयात्रा पर जाना चाहते हो श्रीमान शैल?” अधिकारी ने व्यंग रचा। शैल ने उस व्यंग को ...

अन्तर्निहित - 27

by Vrajesh Shashikant Dave
  • 573

[27]“घटना स्थल पर भी कुछ नहीं मिला, शैल?”“मिलता भी कैसे?”“क्यों?”“वह स्थल घटना स्थल है ही नहीं।”“क्या कह रहे हो? ...

अन्तर्निहित - 26

by Vrajesh Shashikant Dave
  • (4.9/5)
  • 708

[26]“दो दिन से हमने कुछ भी नहीं किया है। इस प्रकार बैठे रहने से तो कार्य आगे बढ़ेगा ही ...

अन्तर्निहित - 25

by Vrajesh Shashikant Dave
  • 1.1k

[25]शैल के फोन की घंटी बजी, “महाशय, यहाँ वत्सर के मंदिर से सारे पत्रकारों को तो वत्सर ने भगा ...

अन्तर्निहित - 24

by Vrajesh Shashikant Dave
  • 780

[24]“डीएनए परीक्षण आरंभ हो चुका है। आठ दिनों में रिपोर्ट या जाएगा।”“तब तक क्या करने का सोचा है, शैल ...

अन्तर्निहित - 23

by Vrajesh Shashikant Dave
  • 762

[23]“शैल जी, मृतदेह के विषय में कुछ ज्ञात हुआ क्या?”“क्या ज्ञात करना चाहती हो?”“यही कि वह व्यक्ति कौन थी? ...

अन्तर्निहित - 22

by Vrajesh Shashikant Dave
  • 999

[22]“क्या हुआ सारा जी?”“ऐसा कभी मत करना। यदि यह मंजूषा बंद कर दी गई तो ..।” सारा आगे बोल ...

अन्तर्निहित - 21

by Vrajesh Shashikant Dave
  • 1.1k

[21]येला की कार्यशाला में भोजन के उपरांत सारा तथा शैल चिंतन करने लगे कि अब इस मंजूषा में आगे ...