CHIRANJIT TEWARY stories download free PDF

तेरे मेरे दरमियान - 114

by CHIRANJIT TEWARY
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दयाल फिर अपनी बात को जारी रखते हूए कहता है:" मालिक ! ये वक्त सौच मे का नही है ...

तेरे मेरे दरमियान - 113

by CHIRANJIT TEWARY
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जानवी आदित्य की और एक टक नजरो से दैखती रहती है आदित्य जानवी से पूछता है --आदित्य :- क्या ...

श्रापित एक प्रेम कहानी - 82

by CHIRANJIT TEWARY
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अघोरी कहता है"" हम्म्..! ठीक है । दक्ष ये बात मेरे और तुम्हारे बिच ही रहनी चाहिए इस बारे ...

तेरे मेरे दरमियान - 112

by CHIRANJIT TEWARY
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रागिनी :- तुम सही कह रही हो , पर जानवी वो सब भूल चुकी थी , वो भूल चुकी ...

श्रापित एक प्रेम कहानी - 81

by CHIRANJIT TEWARY
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निलु के मन मे कुम्भन का डर सता रहा था । इसिलिए वो अपना हाथ के रस्सी को जल्दी ...

तेरे मेरे दरमियान - 111

by CHIRANJIT TEWARY
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रश्मी :- पर इन दो सालो मे क्या हमारी एक बार भी याद नही आई ..?आदित्य :- आई ... ...

तेरे मेरे दरमियान - 110

by CHIRANJIT TEWARY
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जानवी (आँखों में आँसू): - तो तुमने… सच में कभी मुझे छोड़ा ही नहीं आदित्य… सब मेरी गलती है ...

श्रापित एक प्रेम कहानी - 80

by CHIRANJIT TEWARY
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कुंम्भन जौर जौर से हंसते हुए कहता है।" मृत्यु की तुम परिचय मांग रहे हो मुर्ख । आज तेराअंतिम ...

तेरे मेरे दरमियान - 109

by CHIRANJIT TEWARY
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अशोक उसे कहना तो बहुत कुछ चाहता था , अशोक अपनी बेटी की हालत कहना चाहता था पर आदित्य ...

श्रापित एक प्रेम कहानी - 79

by CHIRANJIT TEWARY
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निलु की बात सुनकर कुंम्भन गरजते हूए कहता है।हे मुर्ख मानव । कदाचित मुझे ऐसा प्रतीत हो रहा है ...