R B Chavda stories download free PDF

दिल ने जिसे चाहा - 37

by R. B. Chavda
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मयूर सर ने घड़ी को अपने हाथों में बहुत संभालकर उठाया।उनकी उंगलियाँ उस घड़ी पर ऐसे फिर रही थीं, ...

दिल ने जिसे चाहा - 36

by R. B. Chavda
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सगाई की तारीख तय हो चुकी थी।यह सिर्फ़ एक तारीख नहीं थी... यह उन दो दिलों के वर्षों पुराने ...

दिल ने जिसे चाहा - 35

by R. B. Chavda
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सुबह आज सच में अलग थी।घर वही था, दीवारें वही थीं, लेकिन माहौल में एक अजीब-सी हलचल थी—जैसे हर ...

दिल ने जिसे चाहा - 34

by R. B. Chavda
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बहुत देर रात तक रुशाली की आँखों में नींद नहीं आई।कमरे की लाइट बंद थी, खिड़की से हल्की-सी चाँदनी ...

दिल ने जिसे चाहा - 33

by R. B. Chavda
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सुबह की हल्की धूप खिड़की से कमरे में उतर रही थी। कमरे में सन्नाटा था, लेकिन मयूर सर के ...

दिल ने जिसे चाहा - 32

by R. B. Chavda
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अगली सुबह…सुबह की हल्की धूप खिड़की से होकर कमरे में उतर रही थी।मयूर सरदेर तक जागते रहे थे रात ...

दिल ने जिसे चाहा - 31

by R. B. Chavda
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शादी को दो दिन बीत चुके थे…लेकिन मयूर सर के मन में जैसे कोई बात ठहरी हुई थी…एक ऐसी ...

दिल ने जिसे चाहा - 30

by R. B. Chavda
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शादी का venue रोशनी से जगमगा रहा था।चारों तरफ झालरों की चमक, फूलों की खुशबू, और शहनाई की धीमी-सी ...

दिल ने जिसे चाहा - 29

by R. B. Chavda
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रुशाली बिना कुछ कहे वहाँ से चली गई।मयूर सर कुछ पल तक उसी जगह खड़े रहे। उन्हें समझ नहीं ...

दिल ने जिसे चाहा - 28

by R. B. Chavda
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वक़्त जैसे एक पल के लिए ठहर गया था।रुशाली और मयूर सर, अब भी वैसे ही खड़े थे— इतने ...