अमावस्या की रात विधि को हमेशा से ही अजीब लगती थी।न चाँद, न उसकी रोशनी—बस काली चादर ओढ़े आसमान ...
ट्रेन धीरे-धीरे प्लेटफॉर्म पर आकर रुक रही थी। रात के नौ बज चुके थे और शहर की चकाचौंध भरी ...