¶¶ उसकास्पर्श ¶¶ कहानी ...
- एक -मैंने उस गली का फिर से एक और चक्कर लगाया। मुझे कल रात के जैसे कोई भ्रम ...
{ चिखुरी } - १-वह नन्हीं सी जान ...
़ं एक ़ंमैंने कब चाहा था कि उससे मिलूँ? औरमिल ही गया था वह किसी यायावर की तरह एकाएक ...
# पिता #सेठ रत्नाकर अपने समय के धनाढ्य व्यक्तियों में से थे। अच्छा खासा नाम था उनका। सब कुछ ...
मुझे दो दिन बाद होश आया था। डाक्टर नर्सस और जान पहचान के सभी लोगों ने मेरी बचने की ...
दारुण बिलाव के सम्मुख जैसे कि निरीह कपोत स्वयं को असहाय सा अनुभव करता है,ठीक वैसे ही उस समय ...
मारे घर की बड़ी सी खिड़की से तकरीबन एक नन्हें से बच्चे के नन्हें नन्हें दस बारह हाथ की ...
हमारे घर से कुछ ही दूरी पर रेल की कुछेक पटरियां थीं और जिन पर ना जाने कौन कौन ...